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सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸: लकà¥à¤·à¤£, कारण, उपचार, पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, कीमत और दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कà¥à¤¯à¤¾ है?
रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के गठिया को सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कहा जाता है। दरà¥à¤¦ और जकड़न जो गरà¥à¤¦à¤¨ से शà¥à¤°à¥‚ होकर पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ तक जारी रहती है, सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ कहलाती है।
इसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प रीढ़ की विकृति à¤à¥€ हो सकती है जिससे à¤à¥à¤•ी हà¥à¤ˆ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ हो सकती है। सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जो दà¥à¤°à¥à¤¬à¤² कर देती है और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को दिन-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ की सामानà¥à¤¯ गतिविधियों को करने से रोकती है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ उमà¥à¤° या लिंग के बावजूद कई लोगों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। दरà¥à¤¦, जकड़न, रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ का बढ़ना, लिगामेंट और टेंडन में दरà¥à¤¦ के अलावा, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ थकान, बà¥à¤–ार, à¤à¥‚ख न लगना, आंखों का लाल होना जैसी अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से à¤à¥€ पीड़ित हो सकता है।
सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोसिस और सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर है?
हालांकि दोनों सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ यानी सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ और सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोसिस का रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है, लेकिन अंतर हैं। जबकि सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का रीढ़ पर à¤à¤• सूजन-संबंधी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है, सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोसिस का अपकà¥à¤·à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होता है। पूरà¥à¤µ में कशेरà¥à¤•ाओं के बीच जोड़ों की सूजन की विशेषता होती है, जबकि बाद वाला इंटरवरà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¥à¤°à¤² डिसà¥à¤• और रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के अध: पतन को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है जो बोनी सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¸ के गठन को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के पà¥à¤°à¤•ार कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के पà¥à¤°à¤•ारों में शामिल हैं:
à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸:
इसमें रीढ़ और पेलà¥à¤µà¤¿à¤¸ में सूजन आ जाती है जिससे पीठमें सूजन à¤à¥€ हो जाती है। यह आमतौर पर 45 साल की उमà¥à¤° में शà¥à¤°à¥‚ होता है और यह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° समय निरंतर गतिविधि से बेहतर होता है लेकिन आराम करने से नहीं।
जैसे-जैसे समय बीतता है सूजन से à¤à¤‚किलोसिस हो सकता है जो रीढ़ में नई हडà¥à¤¡à¥€ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है। इस पà¥à¤°à¤•ार रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ को सà¥à¤¥à¤¿à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤¥à¤¿à¤° करना।
à¤à¤‚टरोपैथिक गठिया:
यह सूजन आंतà¥à¤° रोग से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है। इसमें आंत की सूजन होती है और इसमें आंतà¥à¤° शामिल होता है जो फिर से à¤à¤‚टरोपैथिक गठिया की à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– विशेषता है।
इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में पेट दरà¥à¤¦, वजन घटना, दीरà¥à¤˜à¤•ालिक दसà¥à¤¤, मल में खून आना शामिल हैं।
सोरियाटिक गठिया:
इसमें हाथ-पैर के जोड़ों में लगातार सूजन और दरà¥à¤¦ बना रहता है। कà¥à¤› लोगों में सोरियाटिक अरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के कारण तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर रैशेज à¤à¥€ हो जाते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ रीढ़ में अकड़न à¤à¥€ होती है।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया:
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया में आंत या मूतà¥à¤° पथ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। इससे जोड़ों, आंखों, जननांगों, मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯, शà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤®à¤¾ à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ में सूजन और दरà¥à¤¦ à¤à¥€ हो सकता है।
किशोर सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोआरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸:
ये लकà¥à¤·à¤£ बचपन में शà¥à¤°à¥‚ होते हैं और सामानà¥à¤¯ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ की तरह दिखते हैं। इसमें टेंडन या लिगामेंट के मिलने वाली जगह पर सूजन आ जाती है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° समय सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ उमà¥à¤° से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के कारण होता है और वे किसी à¤à¥€ सटीक लकà¥à¤·à¤£ का अनà¥à¤à¤µ नहीं करते हैं।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के सबसे आम लकà¥à¤·à¤£ हलà¥à¤•े दरà¥à¤¦ और जकड़न हैं जो à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ अवधि के बाद और लंबे समय तक बैठने से खराब हो सकते हैं।
कà¥à¤› गंà¤à¥€à¤° लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ हो सकते हैं जिनमें शामिल हैं:
खराब समनà¥à¤µà¤¯
मांसपेशियों में दरà¥à¤¦ या à¤à¤‚ठन
रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ को हिलाने पर चटकने या पीसने जैसा महसूस होना
हाथ या पैर में कमजोरी
मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ या आंतà¥à¤° नियंतà¥à¤°à¤£ पर नियंतà¥à¤°à¤£ का नà¥à¤•सान
चलने में कठिनाई या संतà¥à¤²à¤¨ खोना
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• विकलांगता है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ को विकलांगता के रूप में माना जा सकता है यदि यह गंà¤à¥€à¤° रूप में होता है और किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को काम या नौकरी करने में असमरà¥à¤¥ बनाता है। à¤à¤¸à¥‡ मामलों में, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ सामाजिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ विà¤à¤¾à¤— से मासिक विकलांगता लाठपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठपातà¥à¤° हो जाता है। इसके लिठकà¥à¤› मानदंडों को पूरा करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है जिसमें विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ मेडिकल रिकॉरà¥à¤¡, लैब टेसà¥à¤Ÿ, टेसà¥à¤Ÿ रिकॉरà¥à¤¡, डॉकà¥à¤¯à¥‚मेंटेशन और इलाज करने वाले डॉकà¥à¤Ÿà¤° की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ शामिल है।
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ जेनेटिकà¥à¤¸ है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ कà¥à¤› सà¥à¤¤à¤° पर जेनेटिकà¥à¤¸ हो सकती है लेकिन पूरी तरह से नहीं। à¤à¤‚किलोसिस सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ जीन का वंशानà¥à¤•à¥à¤°à¤® हमेशा à¤à¤• परिवार के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में विकार के विकास से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ नहीं होता है, à¤à¤²à¥‡ ही परिवार के कà¥à¤› सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में विकार हो। हालांकि, यह सच है कि जोखिम को विकसित करने में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ कारकों के साथ आनà¥à¤µà¤‚शिक कारक की à¤à¥‚मिका होती है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का कà¥à¤¯à¤¾ कारण है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• उमà¥à¤° बढ़ने के साथ की घटना है जिसमें कशेरà¥à¤• में सूजन होती है। सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का सबसे आम कारण पीठदरà¥à¤¦ और गरà¥à¤¦à¤¨ का दरà¥à¤¦ है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ इलाज कà¥à¤¯à¤¾ है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लिठसरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® उपचार इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸:
दवा: à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के समय दी जाने वाली दवाओं में शामिल हैं:
अडालीमà¥à¤®à¥‡à¤¬ (हà¥à¤®à¤¿à¤°à¤¾)
सरà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®à¤¾à¤¬ पेगोल (सिमज़िया)
à¤à¤Ÿà¤¾à¤¨à¥‡à¤°à¤¸à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿ (à¤à¤¨à¤¬à¥à¤°à¥‡à¤²)
गोलीमà¥à¤®à¤¬ (सिमà¥à¤ªà¥‹à¤¨à¥€; सिमà¥à¤ªà¥‹à¤¨à¥€ आरिया)
इनà¥à¤«à¥à¤²à¤¿à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤®à¤¾à¤¬ (रेमीकेड)
à¤à¤‚किलोज़िंग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पीड़ित लोगों को शारीरिक उपचार और उपचार à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किठजाते हैं। यह शरीर के लचीलेपन और ताकत में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठकिया जाता है।
à¤à¤‚टरोपैथिक गठिया:
इसमें विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ दवा उपचार दिठजाते हैं जिनमें शामिल हैं:
सलà¥à¤«à¤¾à¤¸à¤¾à¤²à¤œà¥€à¤¨ और अमीनोसैलिसिलेटà¥à¤¸: ये दवाà¤à¤‚ अलà¥à¤¸à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ कोलाइटिस के इलाज के लिठउपयोगी हैं लेकिन ये कà¥à¤°à¥‹à¤¹à¤¨ रोग के लिठमददगार नहीं हैं।
टीà¤à¤¨à¤à¤«-अलà¥à¤«à¤¾ इनहिबिटरà¥à¤¸: यह à¤à¤‚टरोपैथिक गठिया के इलाज में à¤à¤• बड़ी à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है और इसके इंजेकà¥à¤¶à¤¨ तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे दिठजाते हैं या कà¤à¥€-कà¤à¥€ नसों में डà¥à¤°à¤¿à¤ª दी जाती हैं।
डीà¤à¤®à¤à¤°à¥à¤¡: यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की सूजन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª करके जोड़ों से सूजन को दूर करने में मदद करता है।
कॉरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡à¥à¤¸: यह केवल अलà¥à¤ªà¤•ालिक और मधà¥à¤¯à¤® से गंà¤à¥€à¤° उपचार के लिठदिया जाता है।
à¤à¤¨à¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¡à¥€: इसका उपयोग जोड़ों के दरà¥à¤¦ और सूजन को कम करने के लिठकिया जाता है। लेकिन दवाà¤à¤‚ तà¤à¥€ लेनी चाहिठजब इस दवा को लेने के बाद कोई साइड इफेकà¥à¤Ÿ न हो।
सोरियाटिक गठिया:
सोरियाटिक गठिया के दौरान दी जाने वाली दवाà¤à¤‚ हैं:
à¤à¤¨à¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¡à¥€: इनका उपयोग दरà¥à¤¦ निवारक के रूप में किया जाता है और जोड़ों की सूजन को à¤à¥€ कम करता है। दवाà¤à¤‚ इबà¥à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¨, नेपà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¨ सोडियम हैं। लेकिन इन दवाओं को लेने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके गंà¤à¥€à¤° दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हो सकते हैं।
डीà¤à¤®à¤à¤°à¥à¤¡: यह सोरियाटिक गठिया की पà¥à¤°à¤—ति को धीमा कर देता है। इस पà¥à¤°à¤•ार ऊतकों को और नà¥à¤•सान से बचाते हैं।
इमà¥à¤¯à¥‚नोसपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤¨à¥à¤Ÿà¥à¤¸: यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को नियंतà¥à¤°à¤£ में रखने के लिठदिया जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह सोरियाटिक गठिया में सबसे अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥à¤¸à¤¾ है।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया: पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया के दौरान दी जाने वाली दवाà¤à¤‚ हैं:
à¤à¤¨à¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¡à¥€: इनका उपयोग दरà¥à¤¦ निवारक के रूप में किया जाता है और जोड़ों की सूजन को à¤à¥€ कम करता है। दवाà¤à¤‚ इबà¥à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¨, नेपà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¨ सोडियम हैं। लेकिन इन दवाओं को लेने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके गंà¤à¥€à¤° दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हो सकते हैं।
कॉरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡à¥à¤¸: यह केवल अलà¥à¤ªà¤•ालिक और मधà¥à¤¯à¤® से गंà¤à¥€à¤° उपचार के लिठदिया जाता है।
टोपिकल सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡: इसका उपयोग तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ के इलाज के लिठकिया जाता है जो पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया के कारण होता है।
ये कà¥à¤› उपाय हैं जो लोग सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने के लिठअपनाते हैं: à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚पंकà¥à¤šà¤°, वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾, मालिश, अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड उपचार, विदà¥à¤¯à¥à¤¤ उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾, कायरोपà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤• उपचार।
दवाई:
डॉकà¥à¤Ÿà¤° निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित दवा बता सकते हैं:
दरà¥à¤¦ निवारक दवा, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा दरà¥à¤¦ को कम करने के लिठदवाà¤à¤‚, सामयिक कà¥à¤°à¥€à¤®, सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ और संवेदनाहारी दवा के संयोजन के साथ इंजेकà¥à¤¶à¤¨, à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ दवा, à¤à¤‚ठन को कम करने के लिठमांसपेशियों को आराम देने वाली दवा।
सरà¥à¤œà¤°à¥€:
कà¥à¤› रोगियों को सरà¥à¤œà¤°à¥€ की à¤à¥€ सिफारिश की जा सकती है यदि दवाà¤à¤‚ à¤à¥€ काम नहीं कर रही हैं और उपचार के बाद कोई राहत नहीं है। à¤à¤•à¥à¤¸-रे की मदद से डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इमेज टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग की जा सकती है।
उनà¥à¤¨à¤¤ चरणों में सरà¥à¤œà¤°à¥€ ही à¤à¤•मातà¥à¤° विकलà¥à¤ª होता है। जिन लोगों को सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ है उनका इलाज घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ या कूलà¥à¤¹à¥‡ की रिपà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤®à¥‡à¤‚ट सरà¥à¤œà¤°à¥€ से किया जा सकता है। ये सरà¥à¤œà¤°à¥€ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के रोगियों को सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ राहत पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है।
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ ठीक हो सकता है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का कोई इलाज नहीं है बस इसमें देरी हो सकती है या वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® लोगों को थोड़े समय के लिठआराम करने में मदद कर सकता है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ को कैसे रोका जा सकता है?
इन तरीकों से सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ को रोका जा सकता है:
शराब से बचें: शराब हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठअचà¥à¤›à¥€ नहीं होती कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कमजोर कर देती है। इसलिठअगर आप सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पीड़ित हैं तो आपको शराब से बचना चाहिठया अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में इसका सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤°à¤ªà¥‚र कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और विटामिन डी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना: कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और विटामिन डी दोनों ही हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठबहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ और उपयोगी होते हैं। कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में मदद करता है जबकि विटामिन डी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के अवशोषण के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। इस पà¥à¤°à¤•ार ये दोनों à¤à¤• साथ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हैं और सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ को दूर रखते हैं।
सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ बनें: आपको सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤šà¤¿à¤‚ग करते रहना चाहिठऔर अपने शरीर को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक सखà¥à¤¤ नहीं रखना चाहिà¤à¥¤
अचà¥à¤›à¥€ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ बनाठरखना: आपकी रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ का संरेखण उचित होना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह दरà¥à¤¦ को कम करता है और कà¥à¤·à¤¤à¤¿ को रोकता है। गरà¥à¤¦à¤¨, पीठके ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ और कंधे को सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤š करके शरीर का लचीलापन बनाठरखना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤°à¤ªà¥‚र नींद लेना: अगर आप सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पीड़ित हैं तो आपको परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में नींद लेनी चाहिà¤à¥¤ सही आसन, सही गदà¥à¤¦à¥‡ पर सोना बहà¥à¤¤ जरूरी है।
अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° के साथ बात करना: यदि आप सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से संबंधित लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से गà¥à¤œà¤° रहे हैं तो अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के दौरान जीवनशैली में बदलाव करने से à¤à¥€ मदद मिलती है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लिठसरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
ये à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® हैं जो सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लिठसरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® हैं:
अपनी रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ को खींचना
à¤à¤• मजबूत कोर के लिठपà¥à¤²à¥ˆà¤‚क करना
गरà¥à¤¦à¤¨ को सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤š करें
कमर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ के दरà¥à¤¦ से राहत पाने के लिठहिपà¥à¤¸ को सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤šà¤¿à¤‚ग करे
गहरी सांसें लेना
सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोसिस के लिठकौन सा खाना अचà¥à¤›à¤¾ है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के मामले में खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार बेहतर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की कà¥à¤‚जी है। मà¥à¤–à¥à¤¯ फोकस सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वजन बनाठरखना है जो इस मामले में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। कà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दी जाती है जिनमें ताजे फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, साबà¥à¤¤ अनाज, ओमेगा -3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के सà¥à¤°à¥‹à¤¤ जैसे मछली का तेल और अखरोट, परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ तरल पदारà¥à¤¥ यानी पानी, विटामिन डी के लिठआहार पूरक और कम वसा और कम कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨ शामिल हैं।
ये हैं वो à¤à¥‹à¤œà¤¨ जो सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लिठअचà¥à¤›à¥‡ हैं:
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल और साबà¥à¤¤ अनाज से à¤à¤°à¤ªà¥‚र उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥¤
पà¥à¤°à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृत à¤à¥‹à¤œà¤¨ कम से कम करें, और कृतà¥à¤°à¤¿à¤® मिठास और परिरकà¥à¤·à¤•ों से à¤à¥€ बचें।
पूरे दिन परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पानी पिà¤à¤‚।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पीड़ित लोगों के लिठविटामिन, मिनरल सहित संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार लेना आवशà¥à¤¯à¤• है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के जोखिम और जटिलताà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
ये जटिलताà¤à¤‚ हैं जो सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से संबंधित हैं:
आà¤à¤–ों में जलन:सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° इरिटिस (आंखों) की सूजन से पीड़ित होता है।
थकान:सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के दौरान पà¥à¤°à¤®à¥à¤– जटिलताओं में से à¤à¤• है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जोड़ों में शारीरिक परेशानी और अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ दरà¥à¤¦ होता है।
नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिकल जटिलताà¤à¤‚:रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के आधार पर मौजूद नसों में समसà¥à¤¯à¤¾ होने लगती है। यह वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के जीवन पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पैदा करता है जिसमें यौन रोग, आंतà¥à¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® में समसà¥à¤¯à¤¾, पैरों की कमजोरी आदि शामिल हैं।
दिल में जटिलताà¤à¤‚:यदि आप सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ से पीड़ित हैं तो आपके दिल के आधार में दीरà¥à¤˜à¤•ालिक सूजन हो सकती है जो विशेष रूप से महाधमनी वालà¥à¤µ के आसपास और महाधमनी के मूल में पाई जाती है।
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ गंà¤à¥€à¤° है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• दीरà¥à¤˜à¤•ालिक बीमारी है जो जीवन à¤à¤° बनी रह सकती है। यह शरीर के कà¥à¤› कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ जैसे नितंबों, शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿, कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚, à¤à¤¡à¤¼à¥€ और जोड़ों में सूजन से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है, साथ ही विशेष कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ होता है। रोग पà¥à¤°à¤—तिशील है और संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ आजीवन जटिलताओं को जनà¥à¤® दे सकता है जैसे आंखों से संबंधित मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚, कम लचीलापन, थकान, ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥‹à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸, जीआई से संबंधित विकार, दिल से संबंधित जोखिम, और सामाजिक और साथ ही रोजगार की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚।
कà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लिठमालिश अचà¥à¤›à¥€ है?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के मामले में मालिश à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ चिकितà¥à¤¸à¤¾ साबित होती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह मांसपेशियों की जकड़न और दरà¥à¤¦ से राहत पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है। मालिश, विशेष रूप से नरम ऊतक मालिश दरà¥à¤¦ और कठोरता को कम करने में सबसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ है। यह à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में तनाव निवारक के रूप में कारà¥à¤¯ करता है और ततà¥à¤•ाल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से बेहतर गतिशीलता की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ à¤à¥€ देता है।
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के लिठकौन से वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® हैं?
सà¥à¤ªà¥‰à¤¨à¥à¤¡à¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• दीरà¥à¤˜à¤•ालिक और पà¥à¤°à¤—तिशील बीमारी है, इसलिठदैनिक दिनचरà¥à¤¯à¤¾ में वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® को शामिल करना इस आजीवन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤¬à¤‚धित और नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में मददगार साबित हो सकता है। इससे संबंधित वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से पीठ, कूलà¥à¤¹à¥‡, नितंब, गरà¥à¤¦à¤¨ और कंधे की मांसपेशियों सहित पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ मांसपेशियों की उचित गति पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना चाहिà¤à¥¤ उनमें से कà¥à¤› में रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ को ऊपर की ओर खींचना, वॉल सिट, पà¥à¤²à¥ˆà¤‚क , खड़े होने पर पैर उठाना, चिन टक, कंधों को मोड़ना, कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ को खींचना, चलना और गहरी सांस लेने के वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® शामिल हैं।
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